छत्तीसगढ़ कोयला और DMF घोटाला: रायपुर जेल में बंद नारायण साहू व सतपाल सिंह को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

छत्तीसगढ़ की सियासत और नौकरशाही में भूचाल लाने वाले कोयला और डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड (DMF) घोटाले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। मामले में पिछले 5 महीनों से रायपुर जेल में बंद आरोपी नारायण साहू और सतपाल सिंह छाबड़ा को देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) से जमानत मिल गई है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए दोनों आरोपियों को राहत दी है। ये दोनों आरोपी फिलहाल आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की न्यायिक हिरासत में थे।

नारायण साहू की क्या थी भूमिका?
ईओडब्ल्यू ने करीब ढाई साल से फरार चल रहे नारायण साहू को 5 महीने पहले गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, साहू मुख्य सरगना सूर्यकांत तिवारी का करीबी सहयोगी था। कोयला परिवहन में अवैध लेवी वसूलने और पैसों को ठिकाने लगाने में उसकी अहम भूमिका थी। सूर्यकांत तिवारी ने साहू के नाम पर कई बेनामी संपत्तियां भी खरीदी थीं।

सतपाल सिंह पर DMF घोटाले का आरोप
सतपाल सिंह छाबड़ा का नाम छत्तीसगढ़ के बड़े DMF (डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड) घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि विभिन्न जिलों में डीएमएफ के तहत टेंडर आवंटन में भारी वित्तीय अनियमितताएं की गईं। अपात्र लोगों को फायदा पहुंचाया गया और इस कमीशन का 40% हिस्सा सीधे सरकारी अफसरों तक पहुंचता था। EOW ने सतपाल के खिलाफ धारा 120बी और 420 के तहत मामला दर्ज किया था।