41 साल बाद भी नहीं फीका ‘सुन साहिबा सुन’ का जादू, मंदाकिनी और लता मंगेशकर की जोड़ी ने रचा इतिहास

राम तेरी गंगा मैली 16 अगस्त 1985 को रिलीज हुई थी और यह उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में शामिल रही। राज कपूर निर्देशित यह फिल्म उनकी आखिरी निर्देशित फिल्म भी थी।

हिंदी सिनेमा के सदाबहार रोमांटिक गानों की बात हो और ‘सुन साहिबा सुन’ का जिक्र न हो, ऐसा कम ही होता है। फिल्म राम तेरी गंगा मैली का यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच खास पहचान रखता है। गाने को महान गायिका लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी और इसे अभिनेत्री मंदाकिनी पर फिल्माया गया था।

मंदाकिनी की खूबसूरती और लता की आवाज ने बनाया खास

1985 में रिलीज हुई राज कपूर की फिल्म राम तेरी गंगा मैली में मंदाकिनी ने गंगा का किरदार निभाया था। फिल्म के गीतों में ‘सुन साहिबा सुन’ ने अपनी अलग जगह बनाई। लता मंगेशकर की सुरीली आवाज और मंदाकिनी की स्क्रीन मौजूदगी ने इस गीत को रोमांटिक गीतों की यादगार सूची में शामिल कर दिया।

इस गाने के बोल हसरत जयपुरी ने लिखे थे, जबकि फिल्म का संगीत रविंद्र जैन ने तैयार किया था। ‘सुन साहिबा सुन’ के लिए हसरत जयपुरी को 33वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में सर्वश्रेष्ठ गीतकार की श्रेणी में नामांकन भी मिला था।

‘राम तेरी गंगा मैली’ का संगीत आज भी यादगार

फिल्म के संगीत में ‘सुन साहिबा सुन’ के अलावा ‘एक राधा एक मीरा’, ‘हुस्न पहाड़ों का’ और ‘तुझे बुलाएं ये मेरी बहनें’ जैसे गीत भी शामिल थे। फिल्म के संगीत के लिए रविंद्र जैन को फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक पुरस्कार मिला था।

राम तेरी गंगा मैली 16 अगस्त 1985 को रिलीज हुई थी और यह उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में शामिल रही। राज कपूर निर्देशित यह फिल्म उनकी आखिरी निर्देशित फिल्म भी थी।

चार दशक से ज्यादा समय बीतने के बावजूद ‘सुन साहिबा सुन’ की लोकप्रियता बनी हुई है। यही वजह है कि लता मंगेशकर की आवाज, रविंद्र जैन का संगीत और मंदाकिनी की अदाकारी से सजा यह गीत आज भी पुराने हिंदी सिनेमा के यादगार रोमांटिक गीतों में गिना जाता है।