कृषि शिक्षक भर्ती में B.Ed की अनिवार्यता पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 65 अभ्यर्थियों की छूट की मांग खारिज

कोर्ट ने कहा कि पात्रता मानदंड, न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और सेवा संबंधी नियम तय करना नियम बनाने वाले प्राधिकरण अथवा राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायालय अनिवार्य योग्यता में छूट देकर अपने स्तर पर कोई नई व्यवस्था नहीं बना सकता।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कृषि शिक्षक भर्ती में B.Ed की अनिवार्यता को लेकर दायर याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने B.Ed की अनिवार्य योग्यता से छूट देने की मांग को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने 20 अगस्त 2026 को 65 अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त कर दिया।

अभ्यर्थियों ने मांगी थी एक बार की छूट

याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि वर्तमान में B.Ed की डिग्री नहीं होने के बावजूद उन्हें कृषि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने दिया जाए। साथ ही चयन होने की स्थिति में निर्धारित समय सीमा के भीतर B.Ed पूरा करने का अवसर देने और इसके लिए एक बार की संक्रमणकालीन छूट देने की मांग की गई थी।

अभ्यर्थियों का तर्क था कि वर्ष 2019 में लागू पात्रता व्यवस्था के तहत कृषि शिक्षक पद के लिए B.Ed अनिवार्य नहीं था। बाद में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के 5 फरवरी 2025 के फैसले के बाद राज्य सरकार ने 13 फरवरी 2026 को राजपत्र अधिसूचना जारी कर B.Ed को अनिवार्य योग्यता बना दिया।

भर्ती के लिए जारी हो चुका है विज्ञापन

याचिका में कहा गया कि नई योग्यता लागू होने के बाद अभ्यर्थियों को पर्याप्त संक्रमणकालीन समय नहीं मिला। 28 जुलाई 2026 को कृषि शिक्षक भर्ती का संक्षिप्त विज्ञापन जारी किया गया और आवेदन की अंतिम तिथि 2 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। अभ्यर्थियों ने यह भी दलील दी कि B.Ed पाठ्यक्रम पूरा करने में दो शैक्षणिक वर्ष लगते हैं, ऐसे में कम समय में नई योग्यता हासिल करना संभव नहीं है।

राज्य सरकार ने छूट का किया विरोध

राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन बोर्ड ने याचिका का विरोध किया। सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि निर्धारित शैक्षणिक योग्यता में न्यायालय के माध्यम से छूट नहीं दी जा सकती।

राज्य ने हाईकोर्ट की पूर्व डिवीजन बेंच के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कृषि शिक्षक पद के लिए B.Ed से जुड़ी पुरानी छूट को असंवैधानिक और अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित किया जा चुका है। अदालत ने भी माना कि कृषि शिक्षक पद के लिए B.Ed की अनिवार्यता का मुद्दा पहले ही डिवीजन बेंच के स्तर पर तय हो चुका है।

कोर्ट ने कहा- योग्यता में छूट देना संभव नहीं

एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता B.Ed की अनिवार्यता को सीधे तौर पर चुनौती नहीं दे रहे हैं, बल्कि पुराने नियमों के आधार पर एक बार की छूट चाहते हैं। लेकिन जब पूर्व में B.Ed से जुड़ी छूट को असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है, तो वर्तमान नियमों में निर्धारित योग्यता के बिना अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि पात्रता मानदंड, न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और सेवा संबंधी नियम तय करना नियम बनाने वाले प्राधिकरण अथवा राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायालय अनिवार्य योग्यता में छूट देकर अपने स्तर पर कोई नई व्यवस्था नहीं बना सकता।