समाज में प्रेम विवाह को लेकर आज भी कई जगह गहरी सामाजिक दूरी देखने को मिलती है। इसका दर्दनाक उदाहरण सरगुजा जिले में सामने आया, जहां 75 वर्षीय महिला की मृत्यु के बाद उनके अंतिम संस्कार में परिवार और समाज का कोई सदस्य शामिल नहीं हुआ। अंततः प्रशासन और स्थानीय लोगों की मदद से उनका अंतिम संस्कार कराया गया।
जानकारी के अनुसार, महिला ने वर्षों पहले अपनी पसंद से विवाह किया था। इसी कारण परिवार और समाज ने उनसे दूरी बना ली थी। पहले पति की मृत्यु के बाद भी उनका सामाजिक बहिष्कार समाप्त नहीं हुआ। वृद्धावस्था में वह अकेले जीवन बिता रही थीं और निधन के बाद भी उनके पार्थिव शरीर को कंधा देने कोई परिजन नहीं पहुंचा।
घटना की सूचना मिलने पर प्रशासन सक्रिय हुआ। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद स्थानीय सहयोग से महिला का अंतिम संस्कार कराया गया। यह घटना सामाजिक बहिष्कार और प्रेम विवाह को लेकर बनी संकीर्ण सोच पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
यह मामला केवल एक महिला की मृत्यु का नहीं, बल्कि उस सामाजिक मानसिकता का भी आईना है, जहां व्यक्तिगत निर्णय लेने वाले लोगों को वर्षों तक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है।


