लंबे समय से विवादों में रही राधे मां ने पहली बार खुलकर अपने निजी जीवन और अपने ऊपर लगे आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी खुद को संत नहीं बताया और न ही ऐसा कोई दावा किया। उनके अनुसार, वह केवल लोगों को सही राह दिखाने की कोशिश करती हैं।
राधे मां ने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जाता रहा है कि वह लोगों से पैसे लेती हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी किसी से पैसे नहीं मांगे। यदि कोई श्रद्धालु अपनी इच्छा से भेंट या दान देता है, तो उसे रोकना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोग अपनी आस्था के कारण ऐसा करते हैं, न कि उनकी मांग पर।
उन्होंने यह भी बताया कि वह शादीशुदा हैं और उनके बच्चे चाहते हैं कि वह श्रृंगार करें। राधे मां ने कहा कि उनके पहनावे और जीवनशैली को लेकर कई बार गलत धारणाएं बनाई गईं, जिससे उन्हें काफी दुख पहुंचा।
इंटरव्यू के दौरान राधे मां ने खुलासा किया कि विवादों के बाद वह लगभग तीन साल तक अवसाद (डिप्रेशन) से जूझती रहीं और इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ। उन्होंने इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए कहा कि आज लोग आध्यात्मिकता से ज्यादा धन के पीछे भाग रहे हैं।




