टीम इंडिया का हेड कोच बनने से क्यों पीछे हटे वीरेंद्र सहवाग? खुद बताई बड़ी वजह

सहवाग ने कहा कि यदि उन्हें हेड कोच बनाया जाता, तो वह अपनी पसंद का सपोर्ट स्टाफ चुनने की पूरी स्वतंत्रता चाहते थे। उनका मानना था कि किसी भी मुख्य कोच को अपनी कार्यशैली के अनुसार सहयोगी स्टाफ चुनने का अधिकार मिलना चाहिए, ताकि टीम के साथ बेहतर तालमेल बन सके।

भारत के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) ने खुलासा किया है कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच का पद स्वीकार क्यों नहीं किया। सहवाग ने बताया कि उनके लिए राष्ट्रीय टीम का कोच बनना सम्मान की बात थी, लेकिन उन्होंने कुछ शर्तें रखी थीं, जिन पर सहमति नहीं बन सकी।

सहवाग ने कहा कि यदि उन्हें हेड कोच बनाया जाता, तो वह अपनी पसंद का सपोर्ट स्टाफ चुनने की पूरी स्वतंत्रता चाहते थे। उनका मानना था कि किसी भी मुख्य कोच को अपनी कार्यशैली के अनुसार सहयोगी स्टाफ चुनने का अधिकार मिलना चाहिए, ताकि टीम के साथ बेहतर तालमेल बन सके। हालांकि, यह संभव नहीं हो सका और उन्होंने यह जिम्मेदारी नहीं संभाली।

पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी पद के पीछे भागने में विश्वास नहीं रखते। उनके अनुसार, अगर परिस्थितियां और कार्य करने की स्वतंत्रता अनुकूल न हो, तो जिम्मेदारी स्वीकार करने का कोई मतलब नहीं है।

रेस में रहे शामिल लेकिन नहीं मिला मौका

गौरतलब है कि 2017 में भी सहवाग भारतीय टीम के मुख्य कोच पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे, लेकिन अंततः रवि शास्त्री को यह जिम्मेदारी मिली थी। बाद में राहुल द्रविड़ और वर्तमान में गौतम गंभीर भारतीय टीम के मुख्य कोच बने।