छत्तीसगढ़ के पेंशनरों को बड़ी राहत, अब फैसलों के लिए मध्य प्रदेश की मंजूरी जरूरी नहीं

विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था से पेंशनरों को समय पर महंगाई राहत और अन्य वित्तीय लाभ मिलने में आसानी होगी।

छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनरों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब राज्य सरकार को पेंशन और महंगाई राहत (डीआर) से जुड़े निर्णय लेने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। लंबे समय से चली आ रही यह प्रशासनिक बाध्यता समाप्त हो गई है, जिससे पेंशन संबंधी फैसले अधिक तेजी से लिए जा सकेंगे।

यह बदलाव मध्य प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49(6) से जुड़ी व्यवस्था में परिवर्तन के बाद संभव हुआ है। पहले पेंशन और महंगाई राहत बढ़ाने जैसे मामलों में दोनों राज्यों के बीच सहमति आवश्यक होती थी, जिससे निर्णय लेने में देरी होती थी। अब छत्तीसगढ़ सरकार अपने स्तर पर ऐसे फैसले लेने के लिए स्वतंत्र होगी।

हालांकि, इस राहत के साथ राज्य सरकार पर वित्तीय दबाव भी बना रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार, पेंशन और महंगाई राहत से जुड़े खर्च के कारण सरकारी खजाने पर हर वर्ष लगभग 2,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार ने पेंशनरों के हितों को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है।

पेंशनरों को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था से पेंशनरों को समय पर महंगाई राहत और अन्य वित्तीय लाभ मिलने में आसानी होगी। साथ ही, प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल होने से भविष्य में पेंशन संबंधी निर्णय पहले की तुलना में अधिक तेजी से लागू किए जा सकेंगे।