छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के दौरान बस्तर की ऐतिहासिक लोकगाथा पर आधारित ‘झिटकू-मिटकी’ की पारंपरिक कलाकृति भेंट की। यह कलाकृति बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्रेम, समर्पण, त्याग और लोकआस्था का प्रतीक मानी जाती है।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में बस्तर के 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागी, पारंपरिक जनजातीय प्रतिनिधि, पद्मश्री सम्मानित हस्तियां, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया और स्वयं उन्हें भोजन परोसा।
मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को बताया कि झिटकू-मिटकी की प्रेमगाथा लगभग 300 वर्ष पुरानी मानी जाती है। जनश्रुति के अनुसार, अकाल के कठिन दौर में झिटकू और मिटकी ने प्रेम और बलिदान की ऐसी मिसाल पेश की कि आज बस्तर में उन्हें ‘खोड़िया राजा’ और ‘गप्पा देई’ के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और बस्तर पंडुम की सराहना करते हुए भविष्य में बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा से उनका विशेष आत्मीय जुड़ाव है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि इस तरह के अवसर राज्य की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।




